ज़िन्दगी कैसी ये पहेली.....
VT (विश्वनाथ मंदिर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) के हवन कुंड पे हम कुछ दोस्त बैठ कर एग्जाम के टॉपिक डिस्कस कर रहे थे। हम सभी ख़ुद में खोए हुए थे। तभी एक "जिंदगी कैसी ये पहेली..." का इंस्ट्रुमेंटल संगीत बजा। इससे मेरा थोड़ा ध्यान टूटा और मैंने देखा कि 2 बुजुर्ग आकर हमारे सामने वाले कोने में आ बैठे हैं। दोनों बहुत अच्छे दोस्त लग रहे थे। उनके ही फोन में ये म्यूजिक बज रहा था। उनमें से एक नए आने बैग से 1 बॉटल और दो कप निकाला, और आराम से चाय या कॉफी जो भी रहा हो, निकाल कर पीने लगे। कुछ और सोचता उनके बगल में बैठे दिखे दो प्रेमी युगल, जो अपनी ही बातों के दुनिया मे खोए हुए थे। इतने में ही कुछ छोटे से बच्चे खेलते हुए आकर हमारे बगल में शोर मचाने लगे। ये सब घटनाएं बहुत तेज़ी से घट रही थी।
अभी जब सोच रहा हूँ तो लग रहा है कैसे सब उस जगह जुड़ गए थे। हम चारो ज़िन्दगी के अलग अलग आयाम थे। सब खुद में खोए हुए थे, किसी को किसी से कोई मतलब नहीं, पर एकसाथ मिलकर ज़िंदगी के सब रूप सामने ला दे रहे थे....सच में ज़िन्दगी एक पहेली ही है, इसे समझ पाना, सुलझा पाना आसान नही। कभी कल की चिंता में इतना खो जाते हैं हम कि आज जीना भूल जाते हैं, और कभी आज में इतना खो जाते हैं की कल के बारे में सोचना छोड़ देते हैं।
VT (विश्वनाथ मंदिर, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) के हवन कुंड पे हम कुछ दोस्त बैठ कर एग्जाम के टॉपिक डिस्कस कर रहे थे। हम सभी ख़ुद में खोए हुए थे। तभी एक "जिंदगी कैसी ये पहेली..." का इंस्ट्रुमेंटल संगीत बजा। इससे मेरा थोड़ा ध्यान टूटा और मैंने देखा कि 2 बुजुर्ग आकर हमारे सामने वाले कोने में आ बैठे हैं। दोनों बहुत अच्छे दोस्त लग रहे थे। उनके ही फोन में ये म्यूजिक बज रहा था। उनमें से एक नए आने बैग से 1 बॉटल और दो कप निकाला, और आराम से चाय या कॉफी जो भी रहा हो, निकाल कर पीने लगे। कुछ और सोचता उनके बगल में बैठे दिखे दो प्रेमी युगल, जो अपनी ही बातों के दुनिया मे खोए हुए थे। इतने में ही कुछ छोटे से बच्चे खेलते हुए आकर हमारे बगल में शोर मचाने लगे। ये सब घटनाएं बहुत तेज़ी से घट रही थी।
अभी जब सोच रहा हूँ तो लग रहा है कैसे सब उस जगह जुड़ गए थे। हम चारो ज़िन्दगी के अलग अलग आयाम थे। सब खुद में खोए हुए थे, किसी को किसी से कोई मतलब नहीं, पर एकसाथ मिलकर ज़िंदगी के सब रूप सामने ला दे रहे थे....सच में ज़िन्दगी एक पहेली ही है, इसे समझ पाना, सुलझा पाना आसान नही। कभी कल की चिंता में इतना खो जाते हैं हम कि आज जीना भूल जाते हैं, और कभी आज में इतना खो जाते हैं की कल के बारे में सोचना छोड़ देते हैं।